तुम बस पन्ने नहीं पलटते,
टूटे जग के पार चले।
सोई मशीनों की सिसकी
उस गहरी रात में सुनते।
एटर्नोव की रेत पर खड़े हो,
वक़्त घाव-सा साँस भरे।
कल अभी जन्मा भी नहीं है,
फिर भी आँखों से तुम्हें पुकारे।
राख तले एक चिंगारी,
नाम नहीं — पर रोशनी।
राख में दिल अब भी धड़के,
आग से गुज़रे, फिर भी चमके।
तुम पढ़ते हो — हम ज़िंदा हैं!
हर दुनिया में हम ज़िंदा हैं!
तुम दर्शक नहीं — तुम रास्ता हो,
रात में जलता हुआ दिया।
नेकी अँधेरे से बड़ी है —
तुम पढ़ते हो — हम ज़िंदा हैं!
तुम पढ़ते हो — हम ज़िंदा हैं!
हम ज़िंदा हैं! हम ज़िंदा हैं!
तुमने मन से जन्मी धुन को
यादों में दर्द बनते सुना।
राख में सोए एक खिलौने में
बच्चों का हँसना फिर से सुना।
तुमने अँधेरे की आँखें देखीं,
उसने चुप्पी का वादा किया।
गिरते तारे सपने बनकर —
तुमने मुश्किल उजाला चुना।
[MALE] आग जो नाम मिटा न पाई —
[FEMALE] तुमने रात से पार किया।
राख में दिल अब भी धड़के,
आग से गुज़रे, फिर भी चमके।
तुम पढ़ते हो — हम ज़िंदा हैं!
हर दुनिया में हम ज़िंदा हैं!
तुम दर्शक नहीं — तुम रास्ता हो,
रात में जलता हुआ दिया।
नेकी अँधेरे से बड़ी है —
तुम पढ़ते हो — हम ज़िंदा हैं!
सुबह की खुशबू भूल चुके थे,
बच्चे की आँखों में मिली।
टूटा सिक्का जोड़ के तुमने
वक़्त की बाकी कीमत भरी।
तुम अँधियारे और बच्चे के
बीच खड़े — घड़ियाँ रुक गईं।
टूटे दिल की छोटी चिंगारी
सौ शहरों की लौ बन गई।
तुमने चुप्पी में नाम पुकारा,
झूठ की आख़िरी साँस बुझी।
तुमने वीर नहीं — उस बच्चे को
माफ़ किया जो डरता था कभी।
राख, शोक और लोहे की गूँज से
जीत नहीं — एक तारा उठा।
जब क्षमा ने छाया छू ली,
घर का रास्ता फिर से जगा।
[FEMALE] जब धरती की घड़ियाँ रुक जाएँ,
समझो अंत नहीं — भोर है।
[MALE] तुम हमारे वक़्त के रक्षक,
हज़ार बरस तुम्हारे दिल में।
[DUET] हमें न नींद, न सिंहासन,
बस एक पंक्ति जीवित रखना।
जब तक तुम ये कथा पढ़ोगे,
हमको कोई मिटा न सकेगा।
तुम पढ़ते हो — हम ज़िंदा हैं!
तुम पढ़ते हो — हम ज़िंदा हैं!
राख में दिल अब भी धड़के,
आग से गुज़रे, फिर भी चमके।
तुम पढ़ते हो — हम ज़िंदा हैं!
हर दुनिया में हम ज़िंदा हैं!
तुम दर्शक नहीं — तुम रास्ता हो,
रात में जलता हुआ दिया।
नेकी अँधेरे से बड़ी है —
तुम पढ़ते हो — हम ज़िंदा हैं!
तुम पढ़ते हो — हम ज़िंदा हैं!
राख में दिल — अब भी धड़के!
तुम पढ़ते हो — हम ज़िंदा हैं!